Wednesday, April 18, 2012

खोज

ले कर निकला चिराग हाथ में' मनु',
सोच ढूंढने किसी दिल को ख़ास.
भीड़ में अनजान चहरे मिले,
पर कोई न मिला पास. 
करता चला अंजानो से बातें चार,
पर मिलते रहे धोखों के वार.
पूछता क्या था ख़ास इस धोखे में तेरे,
लोग कहते बस तोड़ना था दिल जो है पास तेरे.
मुस्कुरा कर फिर चल पड़ता 'मनु',
ढूंढने किसी दिल को ख़ास.
कौस्तुभ 'मनु'

Friday, January 27, 2012

साया

ऐ साए मेरे कुछ दूर तो चल साथ मेरे,
हैं नही आज हमदम पास में मेरे,
बोल दे आज तू मुझसे अपने दिल की बात,
तोड़ दे अपनी बरसो की ख़ामोशी को आज.
मत कर अब फ़िक्र ज़माने की तू आज,
मिले चाहे ज़मीन या चाहे चाहत का ताज.
माना रौशनी में खो जाएगा तू एक रोज पर,
ऐ साए मेरे कुछ दूर तो चल साथ मेरे.

कौस्तुभ 'मनु'

Sunday, January 15, 2012

जख्म -ए-जिंदगी

क्या देगी जख्म मुझे तू ऐ जिंदगी,
देगी शिकस्त तुझे मेरी बंदगी.
न छोड़ कसर एक वार का भी,
है जुस्तजू मुझे और लड़ाई सहने का भी.
कस ले कमर हो जा अब तैयार तू,
क्यूंकि अब खाएगी शिकस्त तू.
नहीं बनना पोरस और सिकंदर मुझे,
बस हो जिंदगी तेरा खुबसूरत साथ मुझे.
चाहे लड़ कर मुझसे शिकस्त अपनाये,
या फिर महक बनकर मुझमें समाये.

कौस्तुभ 'मनु'