Friday, September 14, 2012

इनायत

उस कशिश की भी कुछ बात थी ,

मानो जैसे उसे सिर्फ मेरी ही आस थी .

शिकवा करते भी थे तो वो मानती थी ,

बुझे रहते थे तो वो हमे हसती थी .
उसकी कमी हमे भी हर वक़्त सताती है,
मानो जैसे हर वक़्त कुछ आसूं संग लाती है.
इंतज़ार अब सिर्फ उस लम्हे का होता है,
जब हर पल लम्हा बेबाक होता है.
कौस्तुभ 'मनु'

Friday, June 15, 2012

ख्वाबों की कहानी

अगर ख्वाब यूँ ही सच होने लगते,
तो ख्वाहिशों का कोई मोल न होता.
करते सिर्फ़ पाने की चाह बस,
पर मिलने का अहसास न होता.
न होती दिलों में आरजू कोई,
कोई दिल में गम ही न होता.

कौस्तुभ 'मनु'

Wednesday, April 18, 2012

खोज

ले कर निकला चिराग हाथ में' मनु',
सोच ढूंढने किसी दिल को ख़ास.
भीड़ में अनजान चहरे मिले,
पर कोई न मिला पास. 
करता चला अंजानो से बातें चार,
पर मिलते रहे धोखों के वार.
पूछता क्या था ख़ास इस धोखे में तेरे,
लोग कहते बस तोड़ना था दिल जो है पास तेरे.
मुस्कुरा कर फिर चल पड़ता 'मनु',
ढूंढने किसी दिल को ख़ास.
कौस्तुभ 'मनु'